भीगी सी पलक पर ठहरा सा इक सितारा
वक़्त की आँखों से फिसलता एक लम्हा बेचारा
कुछ महसूस ही नहीं कर पाता ,
वो किस्मत का था मारा .
जब गिरने लगे तारे पलकों से मोती बन कर ,
जिसपर भी ये पड़े जानिब वो माथा हमारा ,
हम माथे से मोती पोंछें ,
या के हाथों से हटाए तारों को ही देखें ,
उस पल की कयामत पर ,हमने दिल हारा...हमने दिल हारा ....
भीगी सी पलक पर ठहरा सा इक तारा ....
श्रुति मोहन
वक़्त की आँखों से फिसलता एक लम्हा बेचारा
कुछ महसूस ही नहीं कर पाता ,
वो किस्मत का था मारा .
जब गिरने लगे तारे पलकों से मोती बन कर ,
जिसपर भी ये पड़े जानिब वो माथा हमारा ,
हम माथे से मोती पोंछें ,
या के हाथों से हटाए तारों को ही देखें ,
उस पल की कयामत पर ,हमने दिल हारा...हमने दिल हारा ....
भीगी सी पलक पर ठहरा सा इक तारा ....
श्रुति मोहन